पंचवर्षीय योजनाओं में सामाजिक नीति - Social Policy in Five Year Plans
पंचवर्षीय योजनाओं में सामाजिक नीति - Social Policy in Five Year Plans
प्रारंभ से ही भारतीय परिदृश्य में नीति निर्माण के संदर्भ में सामाजिक नीति केंद्रीय तत्वके रूप में विद्यमान रह है। सम्पूर्ण स्वतंत्रता आंदोलन में सामाजिक नीति से संबंधित विषय जनचर्चा एवं आंदोलन के केंद्र में रहे। आजाद भारत में इन विभिन्न सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक असमानताओं को दूर करने के लिए नियोजित अर्थव्यस्था का मार्ग अपनाया गया। ऐसी नीतियों और योजनाओं का निर्माण किया गया जो संविधान में लिखित मूल्यों का संवर्धन कर सके। विकास को सामाजिक न्याय के साथ सम्मिलित किया गया। इन विभिन्न योजनाओं में सामाजिक विकास से संबंधित आयामों- स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, रोजगार आदि से जुड़ी नीतियों को स्थान दिया गया। इन योजनाओं में निर्धनता उन्मूलन, रोजगार व आय में वृद्धि आर्थिक एवं सामाजिक असमानता में कमी, सार्वजनिक सुविधाओं एवं संस्थानों की उपलब्धता, कल्याणकारी सेवाओं की पूर्ति जनसहभागिता को प्रोत्साहन, वंचित एवं दलित वर्गों का उत्थान इत्यादि पर जोर दिया गया।
आजादी के पश्चात भारतीय लोकतंत्र में सामाजिक, आर्थिक विकास के लिए मिश्रित अर्थव्यवस्था का मार्ग चुना और सरकारी क्षेत्र के जरिए व्यापक आधारभूत संरचना के काम को तरजीह दी। इससे जनता को आधारभूत सुविधाएं मुहैया हुई। पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यसे सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों को समयानुसार तरजीह दी और विशेष कार्यक्रम प्रारंभ कर सामाजिक एवं आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्त किया। लोगों को रोजगार, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ पेयजल, विद्युत, परिवहन इत्यादि सुविधाएं आसानी से उपलब्ध कराने के लक्ष्य को सामने रख कर पंचवर्षीय योजनाओं में विस्तृ कार्य किए गए। कई बार सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित समुदायों को सशक्त करने हेतु विशेष कार्यक्रम चलाए गए अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति महिला, बाल, वृद्ध, विकलांग, अल्पसंख्यक आदि समुदायों को समाज की मुख्यधारा में स्थान प्रदान करने और उन्हें सक्षम बनाने हेतु सरक नीतियां और कार्यक्रम बनाए गए। इसका लक्ष्य समाज में होने वाले विकास को समावेशी बनाना और विकास का लाभ समस्त लोगों तक पहुँचाना रहा है। विभिन्न पंचवर्षीय योजनाओं के उद्देश्यएक समतापूर्ण समाज की स्थापना के लक्ष्य को प्राप्त करने के साधन रहे हैं।
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